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स्मार्ट बिडिंग के बारे में जानकारी

ध्यान दें: Google Ads, जून 2026 से बिडिंग की रणनीतियों को लेबल करने के तरीके को अपडेट कर रहा है. "टारगेट सीपीए के साथ कन्वर्ज़न बढ़ाएं" का नाम बदलकर "टारगेट सीपीए" किया जा रहा है. साथ ही,"टारगेट आरओएएस के साथ कन्वर्ज़न वैल्यू बढ़ाएं" का नाम बदलकर "टारगेट आरओएएस" किया जा रहा है. इस बदलाव के दौरान, आपको दिखने वाले नामों में थोड़ा अंतर हो सकता है. हालांकि, बिडिंग का तरीका पहले जैसा ही रहेगा. इन बदलावों की वजह से, आपको अपने खाते में कोई कार्रवाई करने की ज़रूरत नहीं होगी.

सर्च कैंपेन के लिए, स्मार्ट बिडिंग की रणनीतियों को व्यवस्थित करने के तरीके में हुए बदलावों के बारे में ज़्यादा जानें.

Google Ads की स्मार्ट बिडिंग, बिडिंग की उन रणनीतियों को कहते हैं जिनमें हर नीलामी में कन्वर्ज़न या कन्वर्ज़न वैल्यू को ऑप्टिमाइज़ करने के लिए, Google के एआई का इस्तेमाल होता है. इस सुविधा को “ऑक्शन टाइम बिडिंग" कहते हैं. स्मार्ट बिडिंग में टारगेट सीपीए, टारगेट आरओएएस, कन्वर्ज़न बढ़ाना, और कन्वर्ज़न वैल्यू बढ़ाना ये सभी स्मार्ट बिडिंग की रणनीतियां हैं.

स्मार्ट बिडिंग, Google Ads में बिडिंग के कई तरीकों में से एक तरीका है.

इस पेज पर इन विषयों के बारे में बताया गया है


स्मार्ट बिडिंग की रणनीतियां

अपने लक्ष्यों के हिसाब से, Google Ads की स्मार्ट बिडिंग की सही रणनीति चुनें:

अपनी भाषा में सबटाइटल देखने के लिए, YouTube कैप्शन चालू करें. इसके लिए, वीडियो प्लेयर में मौजूद सेटिंग आइकॉन YouTube सेटिंग आइकॉन की इमेज को चुनें. इसके बाद, सबटाइटल/कॉपी को चुनकर अपनी भाषा चुनें.


कारोबार का लक्ष्य कैंपेन का लक्ष्य स्मार्ट बिडिंग की रणनीतियां
बिक्री या लीड बढ़ाना किसी तय बजट पर या आरओआई के हिसाब से, ज़्यादा से ज़्यादा कन्वर्ज़न वैल्यू पाना कन्वर्ज़न बढ़ाना, टारगेट सीपीए
मुनाफ़ा बढ़ाना किसी तय बजट पर या विज्ञापन खर्च पर रिटर्न (आरओएएस) के हिसाब से, ज़्यादा से ज़्यादा कन्वर्ज़न पाना टारगेट आरओएएस, कन्वर्ज़न वैल्यू बढ़ाना
ध्यान दें: सबसे अच्छे नतीजे पाने के लिए स्मार्ट बिडिंग की कुछ रणनीतियां, कैंपेन के टाइप के आधार पर पुराने कन्वर्ज़न डेटा के कम से कम थ्रेशोल्ड पर निर्भर करती हैं. इन सुझावों की जानकारी पाने के लिए, स्मार्ट बिडिंग की इन रणनीतियों से जुड़े लेख पढ़ें:

स्मार्ट बिडिंग के फ़ायदे

Google Ads की स्मार्ट बिडिंग, लक्ष्य के आधार पर होने वाली ऑटोमेटेड बिडिंग के फ़ायदों का भी इस्तेमाल करती है. साथ ही, उन्हें कन्वर्ज़न (खरीदारी या सेवाओं में तब्दील हुए क्लिक) और कन्वर्ज़न वैल्यू पर लागू करती है.

स्मार्ट बिडिंग इस्तेमाल करने के चार अहम फ़ायदे हैं. इनसे आपको समय बचाने के साथ-साथ परफ़ॉर्मेंस बेहतर बनाने में भी मदद मिल सकती है.

1. ऐडवांस मशीन लर्निंग

स्मार्ट बिडिंग में मशीन लर्निंग एल्गोरिदम की मदद से बड़े पैमाने पर डेटा का विश्लेषण किया जाता है. इससे आपको अपने खाते के लिए, यह ज़्यादा सटीक अंदाज़ा मिलता है कि बिडिंग की अलग-अलग कीमतों का कन्वर्ज़न या कन्वर्ज़न वैल्यू पर क्या असर पड़ सकता है. किसी व्यक्ति या टीम के मुकाबले, ये एल्गोरिदम आपकी परफ़ॉर्मेंस पर असर डालने वाले पैरामीटर का आकलन कहीं ज़्यादा बड़े पैमाने पर करते हैं.

2. संदर्भ के हिसाब से मिलने वाले सिग्नल

ऑक्शन टाइम बिडिंग की सुविधा से, अपनी बिड के ऑप्टिमाइज़ेशन के लिए कई तरह के सिग्नल का इस्तेमाल किया जा सकता है. ये सिग्नल किसी व्यक्ति या उससे जुड़ी जानकारी की पहचान बताने वाले एट्रिब्यूट होते हैं, जिनका इस्तेमाल नीलामी के दौरान किया जा सकता है. इनमें डिवाइस और जगह की जानकारी जैसे एट्रिब्यूट शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल मैन्युअल तौर पर बिड में बदलाव करने के लिए किया जा सकता है. साथ ही, इनमें स्मार्ट बिडिंग में इस्तेमाल किए जाने वाले अतिरिक्त सिग्नल और सिग्नल के कॉम्बिनेशन वाले एट्रिब्यूट भी शामिल हैं. इनमें से कई अहम सिग्नल की सूची यहां देखें.

ऑटोमेटेड बिडिंग के सिग्नल

डिवाइस

जानकारी: जानकारी: टारगेट सीपीए या टारगेट आरओएएस जैसी रणनीतियों के लिए, Google Ads इस आधार पर बिड को ऑप्टिमाइज़ कर सकता है कि कोई व्यक्ति कौनसा डिवाइस इस्तेमाल कर रहा है. जैसे, मोबाइल, डेस्कटॉप या टैबलेट.

उदाहरण: किसी कार विक्रेता के लिए बिड में तब बदलाव किए जा सकते हैं, जब कोई व्यक्ति फ़ोन या टैबलेट पर कार खरीदने से जुड़ी जानकारी खोज रहा हो. ऐसा इसलिए, क्योंकि यह संभावना ज़्यादा होती है कि वह आस-पास के शोरूम पर विज़िट करने के लिए अपॉइंटमेंट बुक कर सकता है.

जगह की जानकारी

जानकारी: Google Ads किसी व्यक्ति के रहने की जगह के आधार पर भी बिड को ऑप्टिमाइज़ कर सकता है. यह उसके शहर का सटीक अनुमान लगा लेता है. इससे फ़र्क़ नहीं पड़ता कि विज्ञापन देने वाले लोग या कंपनी ने उस व्यक्ति की जगह के हिसाब से टारगेटिंग की सुविधा लागू की है या नहीं.

उदाहरण: मान लीजिए कि विज्ञापन देने वाले किसी व्यक्ति या कंपनी ने किसी बैंक के लिए, जगह के हिसाब से टारगेटिंग को न्यूयॉर्क शहर पर सेट किया है. इसके बाद, अगर कोई व्यक्ति किसी ऐसे शहर से "न्यू चेकिंग अकाउंट" खोजता है जहां बैंक की शाखाएं ज़्यादा हैं, तो यह संभावना ज़्यादा है कि वह व्यक्ति उसी शहर में खाता खुलवाने के लिए आवेदन करेगा. ऐसी स्थिति में बिडिंग में बदलाव किया जा सकता है.

लोकेशन इंटेंट

जानकारी: Google Ads किसी व्यक्ति के लोकेशन इंटेंट के साथ-साथ उसकी जगह के आधार पर भी बिड को ऑप्टिमाइज़ कर सकता है.

उदाहरण: यात्रा की सेवा देने वाली किसी कंपनी के लिए बिडिंग में तब बदलाव किया जा सकता है, जब कोई व्यक्ति छुट्टियां बिताने के लिए कोई ऐसी जगह खोज रहा हो जिसके लिए वह कंपनी ऑफ़र दे रही हो. उदाहरण के लिए “paris vacations august”. इससे फ़र्क़ नहीं पड़ता कि वह व्यक्ति खुद उस जगह के आस-पास मौजूद है या नहीं.

कामकाजी दिन और स्थानीय समय

जानकारी: Google Ads किसी व्यक्ति के टाइम ज़ोन में उसके स्थानीय समय और हफ़्ते के किसी दिन के आधार पर बिड को ऑप्टिमाइज़ कर सकता है.

उदाहरण: किसी रेस्टोरेंट के लिए बिडिंग में तब बदलाव किया जा सकता है, जब कोई व्यक्ति गुरुवार रात 8 बजे रेस्टोरेंट खोज रहा हो. ऐसा इसलिए, क्योंकि इस दिन और समय में वीकेंड के लिए बुकिंग कराने की संभावना ज़्यादा होती है. ऐसी संभावना, सोमवार सुबह 8 बजे की जाने वाली खोज के लिए नहीं होती है.

रीमार्केटिंग सूची

जानकारी: Google Ads इस आधार पर सर्च, डिसप्ले, और होटल के लिए बिड को ऑप्टिमाइज़ कर सकता है कि किसी व्यक्ति को किस रीमार्केटिंग सूची के तहत रखा गया है. सर्च और डिसप्ले में यह भी देखा जा सकता है कि किसी उपयोगकर्ता को उस सूची में कब जोड़ा गया था. किसी खास कैंपेन या विज्ञापन ग्रुप के लिए, सर्च में ऐसी सभी सूचियों को भी देखा जा सकता है जिनमें उपयोगकर्ता शामिल है.

उदाहरण: ऑनलाइन कपड़े बेचने वाले किसी खुदरा दुकानदार के लिए बिडिंग में तब बदलाव किया जा सकता है, जब किसी व्यक्ति ने पिछली बार साइट पर जाकर कोई प्रॉडक्ट खोजा हो और उसे पिछले हफ़्ते ही अपने शॉपिंग कार्ट में जोड़ा हो. ऐसा इसलिए, क्योंकि पिछले महीने की तुलना में पिछले हफ़्ते शॉपिंग कार्ट में प्रॉडक्ट जोड़ने वाले उस व्यक्ति के जल्द ही प्रॉडक्ट खरीदने की संभावना हो सकती है.

विज्ञापन की विशेषताएं

जानकारी: Google Ads इस आधार पर बिड को ऑप्टिमाइज़ कर सकता है कि विज्ञापन का कौनसा वर्शन दिखेगा. इसमें यह भी शामिल है कि वह विज्ञापन किसी मोबाइल ऐप्लिकेशन के लिए है या नहीं.

उदाहरण: किसी टेलीकॉम कंपनी के लिए बिडिंग में तब बदलाव किया जा सकता है, जब दिखाया गया विज्ञापन “नई डील” क्रिएटिव या “ज़रूरत के हिसाब से प्लान” क्रिएटिव हो या जब वह इस आधार पर मोबाइल साइट या ऐप्लिकेशन पर ले जाता हो कि उनमें से किस क्रिएटिव से कन्वर्ज़न मिलने की ज़्यादा संभावना है. डिसप्ले कैंपेन के लिए, बिडिंग में इस बात का ध्यान रखा जाता है कि किस तरह के विज्ञापन साइज़ और फ़ॉर्मैट से कन्वर्ज़न की ज़्यादा संभावना है.

भाषा का इंटरफ़ेस

जानकारी: Google Ads किसी व्यक्ति की भाषा से जुड़ी प्राथमिकताओं के आधार पर बिड को ऑप्टिमाइज़ कर सकता है.

उदाहरण: स्पेनिश भाषा सिखाने वाली किसी साइट के लिए “नई भाषा सीखें” जैसी किसी क्वेरी के लिए बिडिंग में तब बदलाव किया जा सकता है, जब किसी व्यक्ति ने भाषा को स्पेनिश के बजाय अंग्रेज़ी पर सेट किया हो, क्योंकि इसकी कम संभावना होगी कि वह व्यक्ति कोई नया ट्यूटोरियल खरीदेगा.

ब्राउज़र

जानकारी: Google Ads इस आधार पर बिड को ऑप्टिमाइज़ कर सकता है कि कोई उपयोगकर्ता किस ब्राउज़र का इस्तेमाल कर रहा है.

उदाहरण: पोषक आहार बनाने वाली किसी कंपनी के लिए बिडिंग में तब बदलाव किया जा सकता है, जब कोई व्यक्ति Chrome पर ऐसी कोई जानकारी खोज रहा हो. ऐसा इसलिए, क्योंकि पहले यह देखा गया है कि दूसरे ब्राउज़र के मुकाबले इस ब्राउज़र पर कन्वर्ज़न मिलने की ज़्यादा संभावना है.

ऑपरेटिंग सिस्टम

जानकारी: Google Ads इस आधार पर बिड को ऑप्टिमाइज़ कर सकता है कि कोई व्यक्ति किस ऑपरेटिंग सिस्टम का इस्तेमाल कर रहा है.

उदाहरण: किसी गेमिंग ऐप्लिकेशन डेवलपर के लिए, बिडिंग में तब बदलाव किया जा सकता है, जब कोई व्यक्ति नए ओएस वर्शन वाले Android डिवाइस से Google Play पर "पहेली वाला गेम" सर्च करता है. ऐसे में पुराने ओएस वर्शन वाले डिवाइस के मुकाबले, नए डिवाइस पर उपयोगकर्ता के ऐप्लिकेशन इंस्टॉल करने की संभावना ज़्यादा होती है.

वास्तविक सर्च क्वेरी (सर्च कैंपेन और शॉपिंग कैंपेन के लिए)

जानकारी: Google Ads सिर्फ़ मिलते-जुलते कीवर्ड ही नहीं, बल्कि विज्ञापन को ट्रिगर करने वाली क्वेरी के टेक्स्ट के आधार पर भी बिड को ऑप्टिमाइज़ कर सकता है.

उदाहरण: जूतों के किसी खुदरा दुकानदार के लिए बिडिंग में तब बदलाव किया जा सकता है, जब किसी व्यक्ति की सर्च क्वेरी “चमड़े के जूते” हो. इसमें “जूते ठीक करने की दुकानें” क्वेरी के मुकाबले नए जूते खरीदने की ज़्यादा संभावना है. भले ही, दोनों क्वेरी का ब्रॉड मैच कीवर्ड “जूते” हो.

Search Network पार्टनर (सिर्फ़ सर्च के लिए)

जानकारी: Google Ads इस आधार पर बिड को ऑप्टिमाइज़ कर सकता है कि विज्ञापन किस सर्च पार्टनर की साइट पर दिखता है.

उदाहरण: उपभोक्ताओं के लिए पैक की गई चीज़ें उपलब्ध कराने वाले किसी ब्रैंड के लिए बिडिंग में तब बदलाव किया जा सकता है, जब क्वेरी किसी ई-कॉमर्स साइट पर की गई ज़्यादा काम की खोज की वजह से हुई हो. ऐसा इसलिए, क्योंकि इस क्वेरी में समाचार साइट से मिलने वाली क्वेरी की तुलना में कन्वर्ज़न की ज़्यादा संभावना होती है.

वेब प्लेसमेंट (सिर्फ़ डिसप्ले के लिए)

जानकारी: Google Ads इस आधार पर बिड को ऑप्टिमाइज़ कर सकता है कि विज्ञापन किस साइट पर दिखता है.

उदाहरण: उपभोक्ताओं के लिए पैक की गई चीज़ें उपलब्ध कराने वाले किसी ब्रैंड के लिए बिडिंग में तब बदलाव किया जा सकता है, जब विज्ञापन किसी लोकप्रिय और ज़्यादा ट्रैफ़िक वाली साइट पर दिखता है, क्योंकि इस तरह की साइट पर कन्वर्ज़न की ज़्यादा संभावना होती है.

साइट व्यवहार (सिर्फ़ डिसप्ले के लिए)

जानकारी: Google Ads आपकी साइट पर की जाने वाली लोगों की गतिविधि के आधार पर बिड को ऑप्टिमाइज़ कर सकता है. इसमें देखे गए पेज की संख्या, खोजे गए प्रॉडक्ट की वैल्यू, कन्वर्ज़न की प्रोसेस में उपयोगकर्ता कहां तक पहुंचे, और उन्होंने पहले किन वेबसाइटों पर विज़िट किया जैसी जानकारी इस्तेमाल की जाती है.

उदाहरण: किसी फ़र्निचर ब्रैंड के लिए बिडिंग में तब बदलाव किया जा सकता है, जब किसी व्यक्ति ने कम प्राइस पॉइंट वाले लैंप की तुलना में, ज़्यादा वैल्यू वाले काउच खोजे हों.

प्रॉडक्ट एट्रिब्यूट (सिर्फ़ शॉपिंग के लिए)

जानकारी: Google Shopping की स्मार्ट बिडिंग की सुविधा, सभी प्रॉडक्ट से जुड़े एक जैसे एट्रिब्यूट, जैसे कि कीमत, स्थिति, ब्रैंड, और प्रॉडक्ट कैटगरी वगैरह के आधार पर बिड को ऑप्टिमाइज़ कर सकती है.

उदाहरण: आउटडोर गियर बेचने वाले किसी खुदरा दुकानदार के लिए बिडिंग में तब बदलाव किया जा सकता है, जब आपने अपने प्रॉडक्ट डेटा में कोई ऐसा नया टेंट जोड़ा हो जो कन्वर्ज़न की ज़्यादा संभावना रखने वाले अन्य टेंट के समान है.

होटल और यात्रा की योजना के एट्रिब्यूट (सिर्फ़ होटल के लिए)

जानकारी: Google Ads किसी उपयोगकर्ता की चुनी गई यात्रा की योजनाओं और होटल एट्रिब्यूट के आधार पर बिड को ऑप्टिमाइज़ कर सकता है.

उदाहरण: किसी होटल के लिए बिडिंग में तब बदलाव किया जा सकता है, जब होटल बुकिंग की ज़्यादा संभावना डिफ़ॉल्ट के बजाय, उपयोगकर्ताओं की पॉज़िटिव रेटिंग और चेक-इन और चेक-आउट करने की तारीखों पर हो.

मोबाइल ऐप्लिकेशन रेटिंग (जल्द उपलब्ध होगी)

जानकारी: Google Ads इस आधार पर बिड को ऑप्टिमाइज़ कर सकता है कि किसी ऐप्लिकेशन को कितनी और किस तरह की समीक्षाएं मिली हैं.

उदाहरण: किसी फ़िटनेस ब्रैंड के लिए बिड में तब बदलाव किया जा सकता है, जब किसी ऐप्लिकेशन को कई अच्छी समीक्षाएं मिलने की वजह से उसे इंस्टॉल किए जाने की संभावना बढ़ गई हो.

कीमत की तुलना (सिर्फ़ शॉपिंग और होटल के लिए)

जानकारी: Google Shopping और होटल के लिए स्मार्ट बिडिंग की सुविधा, इस आधार पर बिड को ऑप्टिमाइज़ कर सकती है कि एक जैसी नीलामियों में हिस्सा ले रहे दूसरे विज्ञापन देने वालों की तुलना में आपके प्रॉडक्ट की कीमत क्या है.

उदाहरण: बर्तनों के खुदरा दुकानदार के लिए, बिडिंग में तब बदलाव किया जा सकता है, जब विज्ञापन देने वाले अन्य लोगों या कंपनियों की तुलना में आपने चाकुओं के सेट पर बेहतर ऑफ़र दिया हो.

सीज़न के हिसाब से (सिर्फ़ Shopping के लिए)

जानकारी: Google Shopping की स्मार्ट बिडिंग की सुविधा, साल के अलग-अलग समय बिड में बदलाव कर सकती है. ये बिड, सीज़न के हिसाब से हुई परफ़ॉर्मेंस के रुझानों पर आधारित होती हैं.

उदाहरण: इलेक्ट्रॉनिक सामान के किसी खुदरा दुकानदार के लिए बिड में तब बदलाव किया जा सकता है, जब कोई व्यक्ति छुट्टियों के सीज़न के दौरान नया टेलीविज़न खरीदने से जुड़ी खोज कर रहा हो, क्योंकि इस दौरान आम तौर पर कन्वर्ज़न की ज़्यादा संभावना होती है.

3. परफ़ॉर्मेंस को बेहतर बनाने के लिए ज़रूरत के मुताबिक कंट्रोल

स्मार्ट तरीके से बोली लगाने की सुविधा से आप परफ़ॉर्मेंस टारगेट तय कर सकते हैं और सेटिंग को अपने कारोबार के यूनीक लक्ष्यों को पाने के लिए अपने हिसाब से तय कर सकते हैं.

4. परफ़ॉर्मेंस की पारदर्शी रिपोर्टिंग

स्मार्ट बिडिंग में ऐसे रिपोर्टिंग टूल दिए गए हैं जिनसे आपकी बिडिंग की परफ़ॉर्मेंस के बारे में अहम जानकारी मिलती है और इनकी मदद से सभी समस्याएं जल्द हल की जा सकती हैं. इनमें ये शामिल हैं:

  • बिडिंग की रणनीति की रिपोर्ट से, आपको यह समझने में मदद मिलती है कि स्मार्ट तरीके से बोली लगाने की आपकी रणनीतियां कैसा परफ़ॉर्म कर रही हैं. बिडिंग की रणनीति की रिपोर्ट ढूंढने का तरीका जानें.
  • बिडिंग की रणनीति के स्टेटस की रिपोर्ट से, बिडिंग के बारे में ज़्यादा जानकारी मिलती है. साथ ही, परफ़ॉर्मेंस का पता चलता है.
  • सर्च और डिसप्ले कैंपेन के लिए कैंपेन ड्राफ़्ट और एक्सपेरिमेंट की मदद से, यह जांच करने में आसानी होती है कि बिडिंग के आपके मौजूदा तरीके की तुलना में स्मार्ट बिडिंग की परफ़ॉर्मेंस कितनी अच्छी है.
  • सिम्युलेटर यह अनुमान लगाते हैं कि अगर आपने अलग सीपीए, आरओएएस टारगेट या बजट सेट किए होते, तो लागत, कन्वर्ज़न, कन्वर्ज़न वैल्यू, इंप्रेशन, और क्लिक जैसी मुख्य मेट्रिक के मामलों में आपके विज्ञापनों की परफ़ॉर्मेंस कैसी होती.
  • चेतावनियां और सूचनाएं , कन्वर्ज़न ट्रैकिंग से जुड़ी समस्याओं को फ़्लैग करती हैं और ठीक करने के सही तरीके बताती हैं.

स्मार्ट बिडिंग का फ़ायदा किसे मिलता है

Google Ads में स्मार्ट बिडिंग की सुविधा, बड़े और छोटे कारोबारों के लिए बेहतर तरीके से काम करती है. स्मार्ट बिडिंग की सुविधा आपके सभी कैंपेन से डेटा का इस्तेमाल करके परफ़ॉर्मेंस को ऑप्टिमाइज़ कर सकती है. इसकी मदद से, जिन नए कैंपेन का अपना कोई डेटा मौजूद नहीं है उनकी परफ़ॉर्मेंस में भी सुधार होता है. नतीजों का सटीक आकलन करने के लिए, Google Ads का सुझाव है कि परफ़ॉर्मेंस को ज़्यादा समयावधि के लिए मेज़र करें. इसमें कम से कम 30 कन्वर्ज़न होने चाहिए. जैसे, कोई महीना या उससे ज़्यादा अवधि (टारगेट आरओएएस के लिए 50 कन्वर्ज़न). टारगेटिंग और कन्वर्ज़न बढ़ाने के लिए कम वॉल्यूम वाले कैंपेन में काम के कीवर्ड जोड़े जा सकते हैं.

अगर विज्ञापन देने वाले लोग या कंपनियां, स्मार्ट बिडिंग का इस्तेमाल कर रही हैं, तो उन्हें स्थानीय कानूनी शर्तों और Google Ads की नीतियों का पालन करना होगा. उदाहरण के लिए, यह पक्का करने की ज़िम्मेदारी आपकी है कि आप स्मार्ट बिडिंग की सुविधा का इस्तेमाल करते समय Google की लोगों के हिसाब से दिखाए जाने वाले विज्ञापनों की नीतियों का पालन करें. यह ज़रूरी है कि आप स्मार्ट बिडिंग में इस्तेमाल किए जाने वाले, काम के सिग्नल के बारे में जान लें. इससे, आपको यह तय करने में मदद मिलेगी कि स्मार्ट बिडिंग, आपके कारोबार के लिए सही है या नहीं.


स्मार्ट बिडिंग की रणनीति बनाना

स्मार्ट बिडिंग की रणनीति बनाने से पहले

Google Ads की स्मार्ट बिडिंग की सुविधा का इस्तेमाल करने के लिए, आपको कन्वर्ज़न ट्रैकिंग की सुविधा चालू करनी होगी. कन्वर्ज़न ट्रैक करने के अलग-अलग तरीकों के बारे में ज़्यादा जानें.

App Connect का इस्तेमाल करके, ऐप्लिकेशन कन्वर्ज़न ट्रैकिंग सेट अप करें. कन्वर्ज़न ट्रैकिंग और डीप लिंकिंग सेट अप करने के लिए, Google Ads खाते में App Connect के इंटरफ़ेस का इस्तेमाल करने पर, ग्राहकों के वेब-टू-ऐप्लिकेशन के अनुभव को बेहतर बनाया जा सकता है. इससे विज्ञापन पर क्लिक करके मोबाइल वेबसाइट पर आने वाले ग्राहकों के मुकाबले, सीधे ऐप्लिकेशन पर आने वाले ग्राहकों से औसतन दो गुना ज़्यादा कन्वर्ज़न रेट मिल सकता है.

इस बेहतर अनुभव की मदद से, ग्राहक अपनी मनचाही कार्रवाई आसानी से पूरा कर सकते हैं. फिर चाहे उन्हें खरीदारी करनी हो, साइन अप करना हो या कार्ट में आइटम जोड़ने हों. साथ ही, App Connect के इंटरफ़ेस से, इन-ऐप्लिकेशन कन्वर्ज़न ऐक्शन ट्रैक किए जा सकते हैं और कैंपेन को बेहतर बनाने के सुझाव पाए जा सकते हैं.

App Connect का इस्तेमाल करने के लिए, इन दो चरणों को अपनाएं:

  1. अपने Google Ads खाते में, टूल आइकॉन टूल आइकॉन को चुनें.
  2. ऐप्लिकेशन विज्ञापन हब को चुनें. यह आपको App Connect के इंटरफ़ेस पर ले जाएगा.

App Connect के इंटरफ़ेस से बेहतर तरीके से कन्वर्ज़न पाने के बारे में ज़्यादा जानें.

किसी एक कैंपेन (स्टैंडर्ड रणनीति) या एक से ज़्यादा कैंपेन (पोर्टफ़ोलियो बिड रणनीति) के लिए, स्मार्ट बिडिंग की रणनीति बनाएं:

  • नए कैंपेन की मदद से बनाएं
  • कैंपेन की सेटिंग में जाकर, बनाएं या बदलें
  • “बिडिंग की रणनीतियों” से बनाएं

बिडिंग की रणनीतियां बनाने, उनकी समीक्षा करने या उन्हें मैनेज करने के लिए, यह तरीका अपनाएं:

  1. Google Ads खाते में, टूल आइकॉन टूल आइकॉन पर क्लिक करें.
  2. सेक्शन मेन्यू में मौजूद, बजट और बिडिंग ड्रॉप-डाउन पर क्लिक करें.
  3. बिडिंग की रणनीतियों को चुनें.

स्मार्ट बिडिंग के लिए, वीडियो विज्ञापन से होने वाला कन्वर्ज़न एट्रिब्यूशन

स्मार्ट बिडिंग का इस्तेमाल करने वाले वीडियो विज्ञापनों के लिए, Google Ads आपके कैंपेन के कन्वर्ज़न डेटा का इस्तेमाल करके यह अनुमान लगाता है कि आपके वीडियो विज्ञापन के साथ यूज़र ऐक्टिविटी होने पर कन्वर्ज़न होने की संभावना कितनी है.

कन्वर्ज़न के लिए ऑप्टिमाइज़ किए गए वीडियो विज्ञापनों वाले कैंपेन टाइप (जैसे, वीडियो ऐक्शन कैंपेन, मांग बढ़ाने में मदद करने वाला कैंपेन, और परफ़ॉर्मेंस मैक्स कैंपेन) के लिए यूज़र ऐक्टिविटी का मतलब है विज्ञापन पर क्लिक होना या उसे कम से कम 10 सेकंड तक व्यू मिलना. अगर दोनों यूज़र ऐक्टिविटी होती हैं, तो सिर्फ़ क्लिक को गिना जाता है. किसी वीडियो विज्ञापन को कम से कम 10 सेकंड तक देखे जाने पर उसे वेबसाइट पर हुए कन्वर्ज़न के तौर पर तब ही गिना जाता है, जब वह कन्वर्ज़न, विज्ञापन देखने के तीन दिनों के अंदर हुआ हो. आपके विज्ञापन पर क्लिक करने वाले उपयोगकर्ताओं के लिए, कन्वर्ज़न अब भी आपकी मौजूदा कन्वर्ज़न विंडो पर एट्रिब्यूट किए जाएंगे.

ब्रॉड मैच वाले कीवर्ड की मदद से, स्मार्ट बिडिंग वाले कैंपेन की संख्या बढ़ाना

ब्रॉड मैच वाले कीवर्ड, खास तौर पर स्मार्ट बिडिंग की रणनीतियों के साथ अच्छी तरह से मेल खाते हैं. इन रणनीतियों में, कन्वर्ज़न बढ़ाना, कन्वर्ज़न वैल्यू बढ़ाना, टारगेट सीपीए, और टारगेट आरओएएस शामिल हैं.

ऑप्टिमाइज़ेशन को बढ़ाने के लिए, मैच टाइप के हिसाब से सेगमेंट करना ज़रूरी नहीं है. बिडिंग सिस्टम, हर क्वेरी की नीलामी के लिए कम या ज़्यादा बिड सेट करता है. इसके लिए, पहले वह पता लगाता है कि क्वेरी कितना बढ़िया परफ़ॉर्म कर सकती है. ब्रॉड मैच में इस्तेमाल होने वाले कीवर्ड लागू करने से, एल्गोरिदम के लिए यह सीखना आसान हो जाता है कि दूसरी नीलामियां को कैसे जल्दी से ढूंढा जाए. इसका फ़ायदा यह है कि आप अपने लक्ष्यों को आराम से पूरा कर सकते हैं. ब्रॉड मैच में इस्तेमाल होने वाले कीवर्ड के बारे में ज़्यादा जानें.


स्मार्ट बिडिंग के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Google Ads कैंपेन को सफल बनाने के लिए, मैन्युअल बिडिंग की तुलना में ऑटोमेटेड बिडिंग का इस्तेमाल करने के क्या फ़ायदे हैं?

ऑटोमेटेड बिडिंग (बिड अपने-आप सेट होना) का इस्तेमाल करने पर, अनुमान लगाने की ज़रूरत नहीं रहती. इससे आपको परफ़ॉर्मेंस के लक्ष्यों को पूरा करने में मदद मिलती है. स्मार्ट बिडिंग, ऐडवांस मशीन लर्निंग का इस्तेमाल करती है. इससे हर नीलामी के समय बिड को ऑप्टिमाइज़ किया जाता है. इसे ऑक्शन टाइम बिडिंग (नीलामी के समय बिड तय करना) कहा जाता है. साथ ही, इसमें कई तरह के कॉन्टेक्स्ट के हिसाब से सिग्नल को ध्यान में रखा जाता है. इससे बिडिंग की रकम के आधार पर, कन्वर्ज़न या कन्वर्ज़न वैल्यू का ज़्यादा सटीक अनुमान लगाया जा सकता है.

स्मार्ट बिडिंग के लिए, Google कितने कन्वर्ज़न का सुझाव देता है?

बिना पिछले डेटा के भी स्मार्ट बिडिंग की सुविधा चालू की जा सकती है. हालांकि, Google का सुझाव है कि कन्वर्ज़न की कुछ बुनियादी शर्तें पूरी की जाएं. इस डेटा से सिस्टम को आपके कैंपेन को कैलिब्रेट करने में मदद मिलती है. साथ ही, इससे आपको अपनी परफ़ॉर्मेंस का सटीक आकलन करने में भी मदद मिलती है.

कैंपेन टाइप के हिसाब से, डेटा से जुड़े सुझाव अलग-अलग होते हैं. इसलिए, आपको हर रणनीति के दिशा-निर्देशों की समीक्षा करने के लिए, खास सहायता गाइड देखनी चाहिए:

क्या शॉपिंग और वीडियो ऐक्शन कैंपेन जैसे अन्य कैंपेन टाइप के लिए, स्मार्ट बिडिंग की रणनीतियों का इस्तेमाल किया जा सकता है?

हां, शॉपिंग और वीडियो ऐक्शन कैंपेन जैसे अन्य कैंपेन टाइप के लिए, स्मार्ट बिडिंग की रणनीतियों का इस्तेमाल किया जा सकता है.

स्मार्ट बिडिंग को अलग-अलग तरह के कैंपेन पर लागू किया जाता है. इसके लिए, हर एनवायरमेंट के हिसाब से यूनीक सिग्नल का इस्तेमाल किया जाता है. उदाहरण के लिए:

  • शॉपिंग कैंपेन, ऑप्टिमाइज़ेशन के लिए प्रॉडक्ट एट्रिब्यूट (जैसे कि कीमत, ब्रैंड, और स्थिति), विज्ञापन देने वाले अन्य लोगों या कंपनियों की तुलना में कीमत, और सीज़न के हिसाब से परफ़ॉर्मेंस के रुझानों का इस्तेमाल करते हैं.
  • वीडियो ऐक्शन कैंपेन और वीडियो वाले अन्य कैंपेन टाइप, जैसे कि मांग बढ़ाने में मदद करने वाले कैंपेन और परफ़ॉर्मेंस मैक्स कैंपेन, कन्वर्ज़न डेटा का इस्तेमाल करते हैं. इससे, विज्ञापन से जुड़ी यूज़र ऐक्टिविटी के आधार पर कन्वर्ज़न की संभावना का अनुमान लगाया जाता है. जैसे, क्लिक करना या कम से कम 10 सेकंड तक वीडियो देखना.

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